दोहरीघाट मऊ/ अर्पित्सेवरानन्द
अंतर्राष्ट्रीय मातेश्वरी परिवार द्वारा इस वर्ष होली का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। सदगुरु जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस विशेष आध्यात्मिक होली कार्यक्रम में देश-विदेश से आए भक्तों ने भाग लेकर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन से हुआ। जैसे ही सदगुरु जी महाराज मंच पर पधारे, पूरा पंडाल “जय मातेश्वरी” और “सदगुरु भगवान की जय” के उद्घोष से गूंज उठा। भक्तों ने गुलाल और पुष्प वर्षा के माध्यम से अपने आराध्य के प्रति प्रेम और श्रद्धा प्रकट की।
सदगुरु जी महाराज ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा के रंग में रंगने का उत्सव है। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य अपने भीतर की अहंकार, द्वेष और ईर्ष्या रूपी ‘होलिका’ को जला देता है, तभी सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक होली खेली जाती है। उनका संदेश था कि प्रेम, समरसता और भाईचारा ही सनातन संस्कृति की पहचान है।
इस अवसर पर विदेशी भक्तों ने भी भारतीय परंपरा के अनुरूप होली खेलकर अपनी आस्था व्यक्त की। भक्ति गीतों पर झूमते श्रद्धालुओं ने गुलाल के साथ-साथ प्रेम और सद्भाव के रंग बिखेरे। पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।
कार्यक्रम के अंत में सदगुरु जी महाराज ने सभी को आशीर्वाद देते हुए समाज में एकता, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाया। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय मातेश्वरी परिवार द्वारा आयोजित आध्यात्मिक होली न केवल रंगों का उत्सव रही, बल्कि आत्मिक जागरण और सामाजिक समरसता का अद्भुत संदेश भी दे गई।