अयोध्या / अर्पितेशेवरा नन्द
धार्मिक प्रवचन के दौरान सदगुरु भगवान ने सुंदर कांड के गूढ़ अर्थों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुंदर कांड केवल रामकथा का एक अध्याय नहीं, बल्कि यह मित्रता, त्याग, सेवा और धर्म के प्रति अडिग निष्ठा का प्रतीक है। प्रवचन के दौरान सदगुरु भगवान ने उपस्थित श्रद्धालुओं से संवाद करते हुए सुंदर कांड के आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया।
सदगुरु भगवान ने जनता से प्रश्न करते हुए कहा, “आप जानते हैं कि इसे सुंदर कांड क्यों कहा जाता है?” उन्होंने स्वयं उत्तर देते हुए बताया कि सुंदर कांड की सुंदरता उसके शब्दों में नहीं, बल्कि उसके भावों में है। यह कांड सखा-भाव का महत्त्व समझाता है, जहाँ हनुमान जी प्रभु श्रीराम के सच्चे मित्र बनकर उनके कार्य को अपने जीवन का लक्ष्य बना लेते हैं। सदगुरु भगवान ने कहा कि सुंदर कांड हमें यह सिखाता है कि सच्ची मित्रता वही है जो संकट में साथ खड़ी हो और बिना किसी स्वार्थ के धर्म के मार्ग पर चल पड़े।
इसी क्रम में सदगुरु भगवान ने धर्म संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि धर्म के कार्यों में अधिक सोच-विचार या संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सेवा को गणना और लाभ-हानि से जोड़ा जाता है, तब वह बोझ बन जाती है, लेकिन जब वही सेवा श्रद्धा और समर्पण से की जाती है, तो वह साधना का रूप ले लेती है। सदगुरु भगवान ने स्पष्ट किया कि धर्म संगठन का कार्य पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के उत्थान के लिए होना चाहिए।
प्रवचन के दूसरे प्रसंग में सदगुरु भगवान ने जटायु और सम्पाती के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि जटायु ने अपनी प्राणों की आहुति देकर भी अधर्म के सामने सिर नहीं झुकाया और प्रभु श्रीराम के धर्मकार्य में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वहीं उनके भाई सम्पाती ने अपने जीवन के कष्टों और पीड़ा को तप और धैर्य में बदलकर आगे चलकर प्रभु श्रीराम के कार्य में मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।
सदगुरु भगवान ने कहा कि धर्म के मार्ग में किया गया कोई भी त्याग व्यर्थ नहीं जाता। कोई जटायु बनकर बलिदान देता है, तो कोई सम्पाती बनकर मार्ग दिखाता है। दोनों ही धर्म के स्तंभ हैं और दोनों से जीवन को दिशा मिलती है।
प्रवचन के अंत में सदगुरु भगवान ने कहा कि सुंदर कांड का संदेश आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। मित्रता, त्याग और निस्वार्थ सेवा ही समाज को जोड़ने वाली शक्ति है और यही भाव मनुष्य के जीवन को वास्तव में सुंदर बनाता है। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सदगुरु भगवान के विचारों को ध्यानपूर्वक श्रवण किया।
इस अवसर पर श्रेष्ठाचार्य आचार्य सुदर्शन जी, राष्ट्रीय महासचिव श्री धर्मानंद पांडे, राष्ट्रीय महासचिव सुक्रीत जी
मीडिया प्रभारी आचार्य विश्वामित्र, अवधुत अखिलेश्वरवानंद, पूर्ण कालिक आचार्य दिव्यानंद, आचार्य भागीरथी, आचार्य अटल , अवधेश जी महाराज वरिष्ठ आचार्य उपस्थित रहे

