वेदों की महिमा और सनातन धर्म में अश्वमेघ के महत्व पर होगा विशेष आयोजन
दोहरीघाट (मऊ)। आचार्य अर्पितेश्वरानन्द
सनातन धर्म की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा को पुनः जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से मातेश्वरी परिवार के सदगुरु जी महाराज के द्वारा 8 फरवरी से 16 फरवरी तक भव्य अश्वमेघ महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। यह महायज्ञ वेदों की महिमा, यज्ञ परंपरा और सनातन धर्म में अश्वमेघ के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व को समर्पित होगा।
आयोजन समिति के अनुसार, अश्वमेघ महायज्ञ वैदिक परंपरा का सर्वोच्च यज्ञ माना जाता है, जिसका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म स्थापना, समाज कल्याण और विश्व शांति है। वेदों में वर्णित यज्ञीय परंपरा के माध्यम से मानव जीवन को सदाचार, सत्य और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करने का संदेश दिया गया है।
महायज्ञ के दौरान विद्वान आचार्यों द्वारा ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद की महिमा पर प्रवचन होंगे। साथ ही यह बताया जाएगा कि किस प्रकार वैदिक मंत्रों और यज्ञीय अनुष्ठानों से वातावरण की शुद्धि होती है तथा मानव चेतना का उत्थान होता है। अश्वमेघ यज्ञ को राष्ट्र की एकता, सामाजिक समरसता और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का प्रतीक माना गया है।
मातेश्वरी परिवार के सदगुरु जी महाराज ने बताया कि आज के भौतिकतावादी युग में वेदों के मूल संदेश को आत्मसात करना अत्यंत आवश्यक है। अश्वमेघ महायज्ञ के माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और शांति का संचार होगा। यह आयोजन युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास होगा
महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संतों और धर्मप्रेमियों के शामिल होंगे आयोजन को लेकर क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है। मातेश्वरी परिवार ने सभी श्रद्धालुओं से इस दिव्य यज्ञ में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।



