यज्ञ विधान ही नहीं विज्ञान भी सद्गुरु जी महाराज
जैनेंद्र कुमार
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यज्ञ अग्निहोत्र देखने में एक बेदी पर लकड़ियां सजाकर उनमें अग्नि जलाकर आहुति देने का काय॔ एक उपक्रम सा लगता है लेकिन वेद शास्त्रों से लेकर कर्मकांड तक यह उपक्रम सिर्फ दिखाई देने वाली एक क्रिया ही नहीं है अगर इसे विधि विधान के अनुसार किया जाए तो उसके परिणाम निश्चित रूप से सामने आते हैं वे परिणाम जिनके लिए यह आयोजन किया जाता है एक रिसर्च के अनुसार अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक प्रोफेसर फ्रीटस स्टॉल ने आज से 40 वर्ष पूर्व इस यज्ञ विधान पर उन्होंने काफी रिसर्च किया और अपने विवेचना में उन्होंने लिखा दुनिया में पिरामिड मंदिर कैथेड्रल और कई प्राचीन स्थापनाऐ और प्रविधियां बनी बिगड़ी लेकिन हिंदू धर्म में व्याप्त यज्ञ आहुति की परंपरा से वातावरण का जो शोधन होता है वह प्रक्रिया किसी भी धर्म के परंपरा में नहीं दिखाई देती एक रिसर्च के अनुसार धरती पर यज्ञ आहुति की परंपरा करीब 5000 वर्ष पुरानी है
और मातेश्वरी परिवार में अनेकों ऐसे उदाहरण है जो यज्ञ विधान की प्रक्रिया के दौरान हजारों लोग पूरी तरीके से स्वस्थ हो गए और आज वह अपना सुखी और स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं यज्ञ विधान के जरिए हम अपने पूर्व कर्मों को बदल सकते हैं और जीवन में संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं मातेश्वरी परिवार केवल यज्ञ विधान ही नहीं बताता अपितु जीवन जिया कैसे जाए जैसे गहरे विषय पर भी हमारे सद्गुरु जी महाराज के विचारों के दर्शन मिलते हैं और कठिन जीवन को सुख पूर्वक और एक कला पूर्वक जीवन जीने का दर्शन मिल जाता है और उनके बताए हुए मार्ग से जीना भी एक कला हो जाता है
आने वाले पंचम अस्वमेघ महायज्ञ के शुभ अवसर पर मातेश्वरी महाधाम में बहुत ही व्यापक और विस्तृत कार्यक्रम का आयोजन है जिसमें 24 घंटे अनवरत अखंड महायज्ञ और सुबह 6 से 7 भजन संध्या और 7:00 से 9:00 रेकी ध्यान योग के कार्यक्रम मुख्य रूप से आयोजित है इन कार्यक्रमों में हमें सद्गुरु जी महाराज के दिव्य दर्शन और प्रवचन मिलते हैं जिनसे लाखों लोगों की जिंदगीयां परिवर्तित और सुधरी है

